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माँ में तेरी सोनचिरैया | WRITTEN BY MRS PRABHA PANDEY 2YODOINDIA POETRY

|| बाबुल दे रहा दुआ बेटी ||

भारी मन से ही सही मगर बाबुल दे रहा दुआ बेटी,
मैके के सुख दुख छोड़ यहीं अपना ससुराल सजा बेटी ।

अब तक तू मेरे आँगन की
चिड़ियों की सखी सहेली थी ।
भाई बहनों के साथ यहीं
रोई, गाई और खेली थी ।

इस आँगन की यादें ले जा और रखना संग सदा बेटी,
मैके के सुख दुख छोड़ यहीं अपना ससुराल सजा बेटी ।

आँगन के आमों की शाखों,
पर तू झूला झूली थी ।
कोयल की कू कू सुन तू भी
कू कू करना ना भूली थी ।

अमराई की ठंडक ले जा लागे ना गर्म हवा बेटी,
मैके के सुख दुख छोड़ यहीं अपना ससुराल सजा बेटी ।

मुस्कान तेरी मेरे घर की,
खुशियों को न्यौता देती थी
हुईं उदास जो तुम, खुशियाँ,
गम की नदिया में गोता थी ।

तू माफ हमें करती जाना हुई हमसे कोई खता बेटी
मैके के सुख दुख छोड़ यहीं अपना ससुराल सजा बेटी ।

बाबुल को पुल्कित कर देता,
बेटी का मुस्काता मुखड़ा ।
माँ के सीने की बोटी है,
पिता के दिल का है टुकड़ा ।

बह रहा आँख से खून निरा, करते हुए तुझे बिदा बेटी
मैके के सुख दुख छोड़ यहीं अपना ससुराल सजा बेटी ।

लेखिका
श्रीमती प्रभा पांडेय जी
” पुरनम “

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