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      || हम कुछ जानें या ना जानें ||

      हम कुछ जानें या ना जानें

      हम कुछ जानें या ना जानें,किन्तु मूल्य पानी का जानें,
      एक बूँद पानी की महिमा हम प्यासे बनकर पहचानें ।

      सार्वजनिक नलों से कोई,
      टोंटी कभी चुरा ना पाये,
      टोंटी होगी दस पचास की,
      पानी अकारथ ही बह जाये,
      पानी व्यर्थ न जाये ठानें,
      हम कुछ जानें या न जानें,
      किन्तु मूल्य पानी का जानें ।

      सब्जी धोने का पानी हम,
      गमलों व क्यारी में डालें,
      कपड़े धुले हुए पानी से,
      घर का आँगन भी धो डालें,
      याद रखें जब जायें नहाने,
      हम कुछ जानें या न जानें,
      किन्तु मूल्य पानी का जानें ।

      देखें कहीं जो पानी रिसता,
      कर प्रयत्न हम जल्दी रोकें,
      पाइप कहीं हो जंग खा गया,
      नया पाइप तुरंत ही ठोंके,
      रोक के रिसना ही हम मानें ।

      हम कुछ जानें या ना जानें, किन्तु मूल्य पानी का जानें,
      एक बूँद पानी की महिमा हम प्यासे बनकर पहचानें ।

      लेखिका
      श्रीमती प्रभा पांडेय जी
      ” पुरनम “

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