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माँ में तेरी सोनचिरैया | WRITTEN BY MRS PRABHA PANDEY 2YODOINDIA POETRY

|| लाचार कर दिया ||

लाचार कर दिया

माता-पिता को हर तरह लाचार कर दिया,
लाज के पर्दे को तार-तार कर दिया ।

सिगरेट है उंगलियों में उड़ा रही धुआँ,
आखिर भविष्य क्या है,का होश है कहाँ ।

सीमित नशे तक जिंदगी का सार कर दिया,
लाज के पर्दे को तार-तार कर दिया ।

क्लब में बैठी हाथ मे विस्की का ग्लास है,
लाज खुद लजा जाये ऐसा लिबास है ।

है नाम मात्र वस्त्र लघु आकार भर दिया,
लाज के पर्दे को तार-तार कर दिया ।

धुन पे थिरक-थिरक नाच नाचती नंगा,
पुरपुरुष की देह पर पूरा बदन टँगा ।

यूँ सभ्यता के नाम का उद्धार कर दिया,
लाज के पर्दे को तार-तार कर दिया ।

अफीम,चरस,ड्रग्स की आदत है पड़ गई,
सोचने की शक्ति ज्यों गटर में सड़ गई ।

तन देने एक गोली में तैयार कर दिया,
लाज के पर्दे को तार-तार कर दिया ।

लेखिका
श्रीमती प्रभा पांडेय जी
” पुरनम “

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