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माँ में तेरी सोनचिरैया | 2YODOINDIA POETRY | लेखिका श्रीमती प्रभा पांडेय जी | पुरनम | WRITTEN BY MRS PRABHA PANDEY JI

|| लक्ष्मी और दुर्गा ||

लक्ष्मी और दुर्गा

एक थी लक्ष्मी बाई झाँसी की रानी,
दूजी थी दुर्गावती,दुर्गा की सानी ।

दोनों की आदत में बचपन से मेल,
घुड़सवारी,शिकार खतरों का खेल ।

पूर्व जन्म की दोनों जैसे थीं बहनें,
तलवार,कटारी जिन्हें प्रिय थे गहने ।

दोनों पर आया था असमय वैधव्य,
उठाना पड़ा राज्य का उत्तरदायित्व ।

दोनों थीं स्वाभिमानी बहादुर,
स्वतंत्रता दीवानी,राजनीति में चतुर ।

दोनों दूरदर्शी न्यायप्रिय महान,
खुशी में प्रजा की थी दोनों की जान ।

एक ने किया था गोरों से युद्ध,
दूजी लड़ी थी,मुगलों विरुद्ध ।

विस्तारवाद के दोनों खिलाफ,
करती नहीं थी पर दुश्मन को माफ ।

दोनों लड़ी जंग बन के मर्दानी,
दोनों ने किये, दुश्मन पानी-पानी ।

नहीं दिखता हमको दोनों में अंतर,
बहादुर थीं दोनों सदा,निरंतर ।

लक्ष्मी का था लाल शक्ति का रंग,
झंडा केसरिया था दुर्गा के संग ।

दोनों ने खाया था अपनों से धोका,
लड़कर मरी थीं भले सबने रोका

बदनसिंग न रस्ता गढ़ा का दिखाता,
आसफरवाँ मारकर ही दिल्ली सिधाता ।

अड़ा घोड़ा लक्ष्मी का था बड़ा नाला,
गज घायल दुर्गा का भी नर्रई नाला ।

कटे सिर मगर ना था सिर झुकाया,
इतिहास दोनों ने पुख्ता रचाया ।

पड़े तीर तलवार दोनों के सिर पर,
कहा दोनों ने था महादेव हर हर ।

कुछ तो सबक लें देशद्रोही नेता,
इसी मिट्टी में खूँ है उन देवीयों का ।

लेखिका
श्रीमती प्रभा पांडेय जी
” पुरनम “

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