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माँ में तेरी सोनचिरैया | WRITTEN BY MRS PRABHA PANDEY 2YODOINDIA POETRY

|| माँ का हृदय | MAA KA HIRADEY ||

माँ का हृदय

जब से बनी है सृष्टि ये,तब से है ये हाल,
माँ का हृदय ही रहा है जग में सदा विशाल ।

जब आये कोख में शिशु, कभी रहे ना रिक्त,
खान-पान संग आक्सीजन में रहता है तृप्त ।

पहुँचे कण-कण किस तरह प्रभु जाने किस हाल,
माँ का हृदय ही रहा है जग में सदा विशाल ।

ममता के मधु घोल में,घुलमिल हो संचार,
लाल रक्त से हो रहा श्वेत दुग्ध तैयार ।

जैसे ही ले जन्म शिशु मिले दुग्ध तत्काल,
माँ का हृदय ही रहा है जग में सदा विशाल ।

शिशु के क्रियाकलाप से कभी न होती रुष्ट,
गीले में सोये सदा कभी न माने कष्ट ।

माँ के त्याग की धुरी से,शिशु हो मालामाल,
माँ का हृदय ही रहा है जग में सदा विशाल ।

माँ के सम्मुख लघु है क्या राजा सावंत,
सहन शक्ति की बात हो,हार जाये भगवंत ।

श्यामा गौ तक शिशुहित बने सिंहनी विकराल,
माँ का हृदय ही रहा है जग में सदा विशाल ।

लेखिका
श्रीमती प्रभा पांडेय जी
” पुरनम “

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