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पर्यावरण संताप | 2YODOINDIA POETRY | लेखिका श्रीमती प्रभा पांडेय जी | पुरनम | WRITTEN BY MRS PRABHA PANDEY JI

|| माँ नर्मदा ||

माँ नर्मदा

ओढ़े सिर पर चूनर धन धन्य धानी,
ओम नमो:नर्मदे जन कल्याणी ।

तेरी कल-कल मधुर,तेरी छल-छल मधुर,
देता जीवन है अमृत समान पानी

अमर कंटक हृदय जन्म दाता तेरा,
ऋषि मुनियों ने गुफा कन्दरा छानी ।

कूदती,फांदती आई पर्वत शिखर,
बने अनुपम प्रपात बना दूध पानी ।

धन्य होते हैं छूकर चरण माँ तेरे,
साधू संतो की टोली महान ज्ञानी ।

सींचती आई मैदानी खेतों को तो,
बनी जन-जन की जीवन नैया तारिणी ।

ग्वारीघाट, धुआँधार की विहंगम छवि,
संगमरमर की छटा धवल सुहानी ।

नीला-नीला से जल,वेग भी है प्रबल,
दोनों हाथों लुटाये दया,कृपा निधानी ।

ओम नमो: शिवाय,ओम नमो: शिवाय,
सन्ध्या परभात भक्तों की यही वाणी ।

लेखिका
श्रीमती प्रभा पांडेय जी
” पुरनम “

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