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माँ में तेरी सोनचिरैया | WRITTEN BY MRS PRABHA PANDEY 2YODOINDIA POETRY

|| माता-पिता का आशिर्वाद ||

माता-पिता का आशिर्वाद

माता-पिता का आशिर्वाद होता ठंडी छाँव,
और स्वर्ग इस दुनिया का है मात-पिता के पाँव ।

इस जहान में ये दोनों जिसको भी मिल जायें,
उसका बिगड़े कुछ नहीं बैरी भले हों गाँव ।

घनी घनेरी राहों को कर देगी रौशन,
मात-पिता की दुआ,चलता नहीं किसी का दाँव ।

जीवन उसका बन जाता हँस के समान,
दुनियां करती रह जाती है काँव, काँव,काँव ।

हो घना जंगल,सागर या फिर रेगिस्तान,
उनको भी मुश्किल लगे जो करना पड़े दुराव ।

दुश्मन की गोली चले या फिर पंजा शेर,
दे सकते वो नहीं है खरोंच, कैसे मारे घाव ।

लेखिका
श्रीमती प्रभा पांडेय जी
” पुरनम “

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