More
    26.7 C
    Delhi
    Saturday, April 20, 2024
    More

      || शबरी के राम | SHABRI KE RAM ||

      शबरी के राम

      शबरी माँ को मेरा प्रणाम,
      जिसके हिरदै राम ही राम

      चुभ जाये ना पग में शूल,
      बिनती कंकर झाड़त धूल,
      रस्ते में फैलावत फूल,
      सोये,जागे,करे ना भूल ।

      और न था जिसको कोई काम,
      राम ही राम,राम ही राम ।

      प्रतिदिन उठती बहुत सबेरे,
      लाती कंद मूल,फल,बेर,
      भागत आती हो ना देर,
      मन मन करती राम की टेर ।

      राम ही उसके जीवन धाम,
      राम ही राम,राम ही राम ।

      चख चख वो रखती थी देख,
      पिचके,खट्टे देती फेंक,
      बैठी राह निहारत टेक,
      करने को प्रभु का अभिषेक ।

      राम ही उसकी भोर और शाम,
      राम ही राम,राम ही राम ।

      रामजी आये सीता साथ,
      लक्ष्मण ज्यों लागा संताप,
      जूठे बेर की ये औकात,
      समझ न पाये लक्ष्मण बात ।

      शबरी झुक झुक करे प्रणाम,
      राम ही राम, राम ही राम ।

      लक्ष्मण भैया ये है प्रीत,
      प्रीत नहीं जानत है रीत,
      प्रीत नहीं बालू की भीत,
      अमृत रस की ये परिणीति ।

      ना ये भक्तिन,ना मैं राम,
      राम ही राम,राम ही राम ।

      लेखिका
      श्रीमती प्रभा पांडेय जी
      ” पुरनम “

      for more poetry by Prabha ji visit माँ में तेरी सोनचिरैया

      ALSO READ  || बेटे की लालच में ||

      Related Articles

      LEAVE A REPLY

      Please enter your comment!
      Please enter your name here

      Stay Connected

      18,753FansLike
      80FollowersFollow
      720SubscribersSubscribe
      - Advertisement -

      Latest Articles