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माँ में तेरी सोनचिरैया | WRITTEN BY MRS PRABHA PANDEY 2YODOINDIA POETRY

|| सुबह शाम ||

क्योंरी बहू क्या ये मुरही तेरा वंश चलायेगी,
सुबह शाम जो इस मुरही को महंगा ढूध पिलाएगी ।


दाल,भात, रोटी,सब्जी ही तुम तो इसको दिया करो,
जितना भी संभव हो इससे घर का काम भी लिया करो ।


अधिक लाड़ दिखलाया तुमने बस कतार लग जायेगी,
सुबह शाम जो इस मुरही को महंगा ढूध पिलाएगी ।


जितना इसे खिलाओगी तुम दूजे के घर जाना है,
इसका खाया पिया तुम्हारे काम भला कब आना है ।


खा पी अच्छा जल्दी ही ये ब्याहन को हो जाएगी,
सुबह शाम जो इस मुरही को महंगा दूध पिलायेगी ।


कपड़ा भी इसको मोटा खादी ही पहनाया कर,
महने में एक आध बार ही सिर में तेल लगाया कर ।


अच्छा पहनेगी तो सब की नजरों में चढ़ जायेगी,
सुबह शाम जो इस मुरही को महंगा दूध पिलायेगी ।

लेखिका
श्रीमती प्रभा पांडेय जी
” पुरनम “

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