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माँ में तेरी सोनचिरैया | 2YODOINDIA POETRY | लेखिका श्रीमती प्रभा पांडेय जी | पुरनम | WRITTEN BY MRS PRABHA PANDEY JI

|| सुर की रानी ||

सुर की रानी

सुरों की कहानी तो सदियों पुरानी,
लता जैसी कोई नहीं सुर की रानी ।

आवाज और सुर चलें ऐसे लय में,
जैसे हवा थम गई हो प्रलय में ।
है ये सच्चाई बहुत जानी मानी,
लता जैसी कोई नहीं सुर की रानी ।

लता को सुनें जब भी कलियाँ चमन की,
सुलग जायें सीने में अग्नि लगन की ।
लगे नाचने मोरनी बन दीवानी,
लता जैसी कोई नहीं सुर की रानी ।

सुने गीत परदेस में जब लता के,
यादे-वतन से भरी पल में आँखें ।
उठी देश की सारी बातें सुहानी,
लता जैसी कोई नहीं सुर की रानी ।

कुर्बानी के गीत कुछ ऐसे गाये,
मस्तक जवानों ने खुश हो नवाये ।
सुना और आँखों में भर लाये पानी,
लता जैसी कोई नहीं सुर की रानी ।

भरा प्रेम भक्ति का ऐसा भजन में,
बची खोट ना आत्मा की लगन में।
भजन सुन बने चोर डाकू भी ज्ञानी,
लता जैसी कोई नहीं सुर की रानी ।

लेखिका
श्रीमती प्रभा पांडेय जी
” पुरनम “

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