|| विज्ञान और हम ||

विज्ञान और हम

ध्वनि तरंगों के सब लेकर अनूठे रंग,
सबके दिमाग में भरी मीठी सी एक तरंग ।

मल्टीमीडिया एक बहुपयोगी तकनीक,
आधुनिक विज्ञान के लाई बहुत नजदीक ।

इंटरनेट प्रणाली एक आधुनिक उपलब्धि,
इंसान की इंसान से पल में कराये संधि ।

ऊर्जा बहुउपयोगी है मिले भिन्न रूप में,
पेट्रोल, डीजल, कोयला,बिजली और धूप में,

पेट्रोल भी ऊर्जा का है बहुत अद्दभुत स्त्रोत,
इसलिये हर राष्ट्र दौड़-दौड़ पेट्रोल संजोत ।

काले सोने कोयले का भी है विस्तार कथा,
किन्तु है वो हम सब की ध्यान योग्य व्यथा ।

अशुद्ध हो रहा हमारा प्यारा पर्यावरण,
रेशे-रेशे,कण-कण में बढ़ रहा है प्रदूषण ।

वा के जैसे ही उपयोगी है अपना जल,
अस्तित्व को खतरा बना है इसके भी हर पल ।

मनुष्य देह में उन्हें ही होता है मधुमेह,
मेहनत जो करते नहीं, है घी शक्कर से नेह ।

तम्बाकू अपनी जुबानी से कह रहा है कथा,
नशा बन रहा है अपनी तरह जीवन व्यथा ।

प्लेग सदा से रह है महाविनाशक रोग,
चूहों से बचकर रहें, तभी रहें निरोग ।

कदम-कदम पर हो रही गैसों की भरमार,
जहरीली गैसें करें हम पर अत्याचार ।

फर करें आकाश का,पर साहस के संग,
तभी मिलेंगे देखने,अंतरिक्ष के रंग ।

गहना भी आकाश का,कहाँ रहा अब दूर,
नील आर्मस्ट्रांग, एडविन आल्ड्रिन कर चुके भृम चूर ।

सभी खगोलक कर रहे मंगल ग्रह की बात,
बहुत शीघ्र हो जायेगी मंगल पर परभात ।

विकिरण रक्षक रही है ओजोन की रक्षा छतरी,
उसमें छिद्र से हो रही चिंता सबको गहरी ।

मौसम के बिखरे हुए अलग-अलग हैं रूप,
कहीं वर्षा-हिमपात की, कहीं है गहरी धूप ।

सबको दहशत दे रहे सुनामी और भूकंप,
इनसे पीड़ित जनों की मदद करें अविलम्ब ।

लेखिका
श्रीमती प्रभा पांडेय जी
” पुरनम “

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