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माँ में तेरी सोनचिरैया | WRITTEN BY MRS PRABHA PANDEY 2YODOINDIA POETRY

|| बढ़िया साड़ी लायेगा ||

बढ़िया साड़ी लायेगा

दीवाली पर बहू के वास्ते बढिया साड़ी लायेगा,
मेरे लिये भी उसी समय खादी की तो ले आयेगा ।

पर के परले साल लाया था कच्चे रंग की धोती थी,
परके साल जो लाया रंग पक्के थे पर वो छोटी थी ।
उनमें से कोई पहनूँगी तो भी गुस्सा खायेगा,
दीवाली पर बहू के वास्ते बढ़िया साड़ी लायेगा ।

चाहे जैसा भी लाता है लाता तो निश्चित ही है,
लहंगा,ब्लाउज नहीं भूलता चप्पल भी निश्चित ही है ।
बहू के लक्ष्मी पूजन से पहले वो मुझे भिजायेगा,
दीवाली पर बहू के वास्ते बढ़िया साड़ी लायेगा ।

बहू पहन के साड़ी जब घर के आँगन में घूमेगी,
गोटा और किनारी उसकी घर की क्यारी चूमेगी ।
साड़ी की जगमग झिलमिल से उजियारा भर जायेगा,
दीवाली पर बहू के वास्ते बढ़िया साड़ी लायेगा ।

लेखिका
श्रीमती प्रभा पांडेय जी
” पुरनम “

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