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पर्यावरण संताप | 2YODOINDIA POETRY | लेखिका श्रीमती प्रभा पांडेय जी | पुरनम | WRITTEN BY MRS PRABHA PANDEY JI

|| साइकल ||

साइकल

घर के छोटे काम के लिए साइकल का उपयोग करें,
हानि नहीं इसमें कतिपय है लाभ मिलेगा योग करें ।

हाथ पैर में गति आ जाती जोड़ दर्द डरकर भागे,
गुठली के भी दाम भंजाऐं,आम चूस लें हम आगे,
सस्ती सुंदर और टिकाऊ हर गृहस्थ ले सकता है,
किश्त पे ले तो आसानी से हर महीने दे सकता है ।

चुस्त दुरुस्त हम बनें रहेंगे जब तक इसका भोग करें,
घर के छोटे काम के लिये साइकल का उपयोग करें ।

आसानी से छोटी संकरी गलियों में हम जा सकते,
आता बेसन और मसाले इस पर रख पिसवा सकते,
बड़ा सुभीता रहता इससे बड़ी बाजार की कुलियों में,
चना चबेना,लाई-बताशे,और मक्के की फुलियों में ।

मंडी से सस्ते फल लाकर खायें तन निरोग करें,
घर के छोटे काम के लिये साइकल का उपयोग करें ।

डीजल व पेट्रोल बचायें,कठिन समय पर आये काम,
वातावरण भी स्वच्छ रहेगा लगे प्रदूषण पर विराम,
सड़को पर ना जाम लगेगा,समय नहीं होगा बर्बाद,
दुर्घटनायें भी ना होंगी रहें खुशी से सब आबाद ।

सही धरातल पर आ ठहरें बिदा दिखावा ढोंग करें,
घर के छोटे काम के लिये साइकल का उपयोग करें ।

लेखिका
श्रीमती प्रभा पांडेय जी
” पुरनम “

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