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माँ में तेरी सोनचिरैया | WRITTEN BY MRS PRABHA PANDEY 2YODOINDIA POETRY

|| श्रीमान जी | SRIMAAN JI ||

श्रीमान जी

बार-बार हमें ना बुलाईये श्रीमान जी,
हाथ घर के काम में बंटाईये श्रीमान जी ।

दाल, चांवल बन गया अब सब्जी चढ़ी है,
ऊपर से माताजी की कुछ त्यौरी चढ़ी है ।

आ गया नल पानी ही भरवाईये श्रीमान जी,
बार-बार हमें ना बुलाईये श्रीमान जी ।

बच्चे भी स्कूल से अब आने वाले हैं,
धुले कपड़े उठाने,बादल छाने वाले हैं ।

अपने टाई, जूते खुद उठाईये श्रीमान जी,
बार-बार हमें ना बुलाईये श्रीमान जी ।

बैठे बैठे आप बस आदेश चलाते,
अखबार तक तो आप,बिस्तर में मंगाते ।

जाती हूँ मैं मैके मत घबराईये श्रीमान जी,
बार-बार हमें ना बुलाईये श्रीमान जी ।

दो चार दिन मैके में मैं रहूँगी ठाठ से,
फरमाइशों से दूर संग सासू की डांट से ।

पीछे पीछे लेने ना आईये श्रीमान जी,
बार-बार हमें ना बुलाईये श्रीमान जी ।

लेखिका
श्रीमती प्रभा पांडेय जी
” पुरनम “

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