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      || श्रीमान जी | SRIMAAN JI ||

      श्रीमान जी

      बार-बार हमें ना बुलाईये श्रीमान जी,
      हाथ घर के काम में बंटाईये श्रीमान जी ।

      दाल, चांवल बन गया अब सब्जी चढ़ी है,
      ऊपर से माताजी की कुछ त्यौरी चढ़ी है ।

      आ गया नल पानी ही भरवाईये श्रीमान जी,
      बार-बार हमें ना बुलाईये श्रीमान जी ।

      बच्चे भी स्कूल से अब आने वाले हैं,
      धुले कपड़े उठाने,बादल छाने वाले हैं ।

      अपने टाई, जूते खुद उठाईये श्रीमान जी,
      बार-बार हमें ना बुलाईये श्रीमान जी ।

      बैठे बैठे आप बस आदेश चलाते,
      अखबार तक तो आप,बिस्तर में मंगाते ।

      जाती हूँ मैं मैके मत घबराईये श्रीमान जी,
      बार-बार हमें ना बुलाईये श्रीमान जी ।

      दो चार दिन मैके में मैं रहूँगी ठाठ से,
      फरमाइशों से दूर संग सासू की डांट से ।

      पीछे पीछे लेने ना आईये श्रीमान जी,
      बार-बार हमें ना बुलाईये श्रीमान जी ।

      लेखिका
      श्रीमती प्रभा पांडेय जी
      ” पुरनम “

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