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    Monday, January 13, 2025
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      || दे के जन्म ||

      दे के जन्म मुझपे बड़ा उपकार किया है,
      भैया को टाफी मुझे मात्र गुड़ ही दिया है ।


      भैया को लेकर दिये बाल और कंचे,
      पर हमारे लिये तो पत्थर भी न जँचे ।


      तिसपे भी सब बूढ़ों का विरोध लिया है,
      दे के जन्म मुझपे बड़ा उपकार किया है ।


      दीवाली पर भैया को वस्त्र और जूते,
      मेरे पुराने चले इस्त्री के बलबूते।


      फिर भी मुझे देख जहर जैसे पिया है,
      दे के जन्म मुझपे बड़ा उपकार किया है ।


      जन्म दिन भैया का कटा केक,दी दावत,
      मेरा जन्म दिन तो जैसे रात अमावस ।


      आँसू के धागे से होठ मैंने सिया है,
      दे के जन्म मुझपे बड़ा उपकार किया है ।

      लेखिका
      श्रीमती प्रभा पांडेय जी
      ” पुरनम “

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