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पर्यावरण संताप | 2YODOINDIA POETRY | लेखिका श्रीमती प्रभा पांडेय जी | पुरनम | WRITTEN BY MRS PRABHA PANDEY JI

|| लकड़ी ||

लकड़ी

हरे-भरे कुछ वृक्ष लगायें

ये हैं अपने हाथ में,

हरयाली भी मूल में पायें

फल भी पायें साथ में ।

ग्रीष्म में ठंडी छाया पायें,

झूला डालें बरसात में,

भीनी भीनी खुशबू के संग

प्राणवाणु सौगात में ।

वृक्षों पर पंछी की सरगम,

मधुर लगे प्रभात में,

अपनी थकन उतारे प्राणी,

रस्ते आवत जात में ।

खिड़की दरवाजों की लकड़ी,

छाल, नोंद खैरात में,

वृक्ष लगाकर पुण्य कमायें

कहावत है हर जात में ।

जन्म समय झूला लकड़ी का,

लकड़ी बात-बात में,

अंत समय अर्थी में लकड़ी

लकड़ी चिता के साथ में ।

लेखिका
श्रीमती प्रभा पांडेय जी
” पुरनम “

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